Tuesday, 4 September 2012

मेरी मौत



मेरी मौत ( 1989- 20_ _)

स ज़िंदगी ने हमें बहुत से रंग दिखाये,
बहुत से चेहरे दिखाये,
बहुत से चेहरों पर से नकाब हटाये,
बहुत से राज़ बताये,
हर वक़्त से रुबरु कराया,
इस ज़िंदगी ने हमें .

क्या करें अपनी ज़िंदगी की बात ,
जिसकी शुरुआत में ही था घना कोहरा व अंधेरी रात,
बचपन था हमारा एक काला साहिल ,
जिसका कोई अंत न था.
बना दिया था हमारे ही अपनों ने ,
ज़िंदगी को हमारी एक मज़ाक,
अपनों से मिले ज़ख्मों का जाम पी-पी के,
घुटन भरा बचपन कब जवानी की दहलीज़
पर आ खड़ा हुआ, इसका हमें
कभी एहसास ही न हुआ.
पर हमने न छोड़ा उम्मीद का दामन,
उम्मीद थी हमें ज़िंदगी तो अपनी जिएंगे शान से,
और मौत को भी तब तक करना होगा इंतज़ार ,
खड़े होकर कतार में.

आज जो पाया है, जो खोया है ,
जो हासिल किया,
जो लिया है , जो दिया है , इस ज़िंदगी को ,
उन सब पर फक्र है हमें.
खुश हैं हम अपनी इस ज़िंदगी से ,
नहीं कोई गम बाकी इस ज़िंदगी में .
अब तो लगता है कि मौत भी देगी,
सुकून व चैन की हर साँस हमें,
चूंकि अब तो कोई रंग न बाकी रहा,
जिसे हमने न जिया हो इस ज़िंदगानी में .

वो वक़्त अब आ गया जिसका हमें इंतज़ार था ,
बड़ी बेकरारी से,
वो सब हमने पा लिया , जिसका हमें करार था ,
अपनी इस ज़िंदगानी से .
नहीं पाई तो बस एक चीज़ जो  है, मेरी मौत.
अब बस कुछ पाना है तो वो है मौत.
अब बस कुछ गले लगाना है तो वो है मौत.

ऎ मेरी मौत ! देख तेरा एक तन्हा आशिक बुला रहा है तुझे .
अब तो तन्हा न छोड़ मुझे,
भर ले आगोश में अपने
ऎ मेरी मौत ! आ गले लगा ले मुझे,
महरुम हूँ तो बस तेरे इश्क़ से.
अब बस आ मुझे थाम ले ,
थाम लेने दे दामन अपना मुझे , ऎ मेरी मौत
ज़िंदगी का सफर यहीं तक ,
मौत के सफर का आरंभ...................

                                                      - ऋषभ शुक्ल


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4 comments:

  1. बेहद उमदा कविता ....बधाई .

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  2. omg..its really emotional ..i have tears in my eyes

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  3. VERY TOUCHING POETRY.... AMAZING BLOG

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