Monday, 10 September 2012

प्रेम बनाम सेक्स


 प्रेम बनाम सेक्स

प्रेम एक बेहद आनंददायक अनुभूति है, सुखद अहसास है परंतु आज के परिवेश में अधिकांश लोग इसको सेक्स का पर्याय मान रहे हैं . आज के आधुनिक समाज में इसका अंतरंग प्रदर्शन आम है . समय के साथ लोगों की सोच में  तेजी से इज़ाफा हो रहा है. आज की मार्डन युवा पीढ़ी अपने प्रेम का खुल के इज़हार करने में यकीन  करती है  ... और प्रेम का इज़हार करने का तरीका सेक्स को मानते हैं ...इसलिये आज लिव - इन -रिलेशनशिप , शादी से पहले बच्चे , सेक्स स्कैंडल जैसी तमाम बातें आम होती जा रही हैं
हमारे आधुनिक समाज में जो संस्कृ्ति पल बढ़ रही है , उसमें मूव - आन { Move On } प्रवृ्त्ति देखी जाती है. किसी भी चीज़ का रसास्वादन करो , आगे बढ़ो और भूल जाओ. लोगों की खासकर युवा पीढ़ी की सोच के स्तर में भी बहुत बदलाव आया है. सूक्ष्म स्तर पर प्रेम जैसी कोमल भावना को आज की युवा पीढ़ी महसूस नहीं कर पाती .
आज के आधुनिक समाज के युवाओं में बढ़ता पोर्न का क्रेज़, सेक्स की तीव्र इच्छा ने कहीं न कहीं प्रेम जैसे खूबसूरत शब्द को भी विसंगतियों से भर दिया है .
नि:संदेह अंतरंग संबंध  दो प्यार करने वालों के रिश्ते को प्रगाढ़ता प्रदान करता करता है परंतु सेक्स की भावना की अत्यधिक प्रचुरता ????? अपने जीवनसाथी से हर पल हर वक़्त सेक्स में लिप्त रहने की अपेक्षा व इच्छा , हमारे आधुनिक समाज की युवा पीढ़ी की कौन सी मनोदशा दर्शाता है??
यदि साहित्य जगत की ही बात करें तो कामोत्तेजक लेखन हर वर्ग के पाठकों को अपनी ओर खींचने में सक्षम है.  यदि फिल्म जगत की बात करें तो यहाँ भी दर्शकों को थियेटर तक लाने में रोमांस और सेक्स का तड़का बेहद कारगर सिद्ध होता है .

प्रेम और सेक्स दोनों अलग शब्द हैं ...दोनों का अर्थ भी भिन्न हैं..... प्रेम को सेक्स का पर्यायवाची कहना या समझना नि:संदेह गलत है. क्योंकि सेक्स मात्र अपने जीवनसाथी को प्रेम दर्शाने का एक हिस्सा है न कि सिर्फ एक मात्र ज़रिया.

आज युवा पीढ़ी अपने पार्टनर से सेक्स में हर दम हर पल कुछ नया चाहते हैं तभी सेक्स की भी दो ब्रांचेस कर दी गईं हैं जो बेहद हास्यास्पद है ...सॉफ्ट सेक्स व हार्ड सेक्स ...यह हमारे आधुनिक समाज की ही देन है.
जमाना बढ़ा और हमारा आधुनिक समाज आज सुपर आधुनिक समाज की दहलीज़ पार करने को भी आतुर है तभी तो आज की युवा पीढ़ी अपने जोड़ीदार से सेक्स में क्या चाहते हैं, एक दूसरे से क्या अपेक्षा रखते हैं ..इस पर खुल के चर्चा होती है... इस खुलेपन के फलस्वरूप सेक्स में  वेरियेशन्स ने जगह बना ली है.  जहाँ हमारे भारतीय समाज में कामसूत्र को ही सेक्स की  कुँजी माना जाता था, अब उसकी जगह पोर्न वेबसाइट्स ने ले ली है.

वाइल्ड  सेक्स, वॉटर सेक्स् , रोस सेक्स्, चॉकलेट सेक्स् , मड सेक्स्, गाड़ी के भीतर सेक्स्, झाड़ियों के पीछे सेक्स्, खुले में सेक्स्, खंबे की पीछे सेक्स् आदि सेक्स् के कुछ "वेरियेशन्स" हैं .

प्रश्न यह उठता है कि सेक्स् में इतने खुलेपन व इसका अनपेक्षित विस्तार हमारी युवा पीढ़ी , हमारे समाज को किस ओर ले जा रहा है ?

ध्यान रहे सेक्स् कहीं प्रेम जैसी खूबसूरत भावना व अनुभूति पर इतना हावी न हो जाए कि प्रेम का पर्याय ही पूर्णतया बदल जाए. क्योंकि प्रेम एक ऐसी भावना है ...एक ऐसा खूबसूरत अहसास है जो आपके हृ्दय के तार आपके जीवन साथी से जोड़ देता है ...आप अपने जीवन साथी पर निस्वार्थ भाव से सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं...संपूर्ण समर्पण की ये भावना अंतरंगता के सभी दायरों को तोड़ शारीरिक व मानसिक संबंध से जुड़ एक नए जीवन का निर्माण व उत्पन्न करने की शक्ति प्रदान करता है .... यही है प्रेम की शक्ति और सच्चे प्रेम का पर्याय.

आपके विचारों, टिप्पणियों, सलाहों  के इंतजार के साथ , आपका :

                                                      - ऋषभ शुक्ल






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7 comments:

  1. too bold...yet genuine & beautiful use of words ..congra8

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  2. You are too cute! Thank you for being so open about everything

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  3. Excellent post ..thanks!

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  4. your blog is a beautiful world of satire.... keep coming up with more blogs
    - anirudh

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  5. You are cute .... rishabh !

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  6. Thanks SO much!!!!!! U are probably the biggest inspiration for me on the blogosphere and I worship your career and writing!

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  7. Wow - such a cool blog
    - arjun pandey

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