Saturday, 1 September 2012

ऎ खुदा




ऎ खुदा

खुदा ! हमसे न हो यूँ खफा ,
कमज़र्फ्  नहीं हैं हम ,
पर बेवफाई का ज़ख्म नहीं सह सकेंगे हम
बेवफाई उनकी न देख सकेंगे हम .
ऎ खुदा ! मेरी है तुमसे बस यही जुबां कि,
मत होने दो बेवफाई का सवेरा ,
चूंकि इससे तो बेहतर है प्यार का अंधेरा.
हमने किया है उनसे बेपनाह प्यार,
किया है उन पर हर पल विश्वास
आखिर प्यार् वो मशाल नहीं ,
जो बुझ जाए हवाओं से ही
प्यार तो वो दीप है ,
जो जलता रहे तुफानों में भी .
हमें इस बात पर यकीं नहीं
कि हमसे की है बेवफाई ,
मेरे प्यार् ने ही.
फिर क्या तुने ये कर दिया मेरे खुदा कि
जिन पर था हमको यकीं , दूर हो गई वो
हमसे कहीं.
अब तो साँसे सिसकियाँ भर रहीं हैं,
इंतज़ार में वफा के ,
इंतजार खत्म कर ऎ खुदा
वफा से, वफा से.
सह न सकेंगे दर्द हम उनसे जुदाई का,
पी न सकेंगे जाम उनकी बेवफाई का.
ऎ खुदा ! दे दे हमें ऐसी कोई दुआ,
कि वो ना हो जाएं हमसे यूँ जुदा.
दिल की धड़्कनों से अब यूँ  खेल मत ऎ खुदा !
मत दो उनकी बेवफाई की ऐसी दर्दनाक ये सजा.
क्या हो गई है हमसे कोई खता?
फिर क्यों हो गए हो तुम हमसे यूँ खफा.
क्या है मेरे प्यार की ,
मुझसे बेवफाई की वजह ?
ऎ खुदा ...........................


                            - ऋषभ शुक्ल





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3 comments:

  1. खूबसूरत कविता …आप को बधाई

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  2. Loved this poetry !!

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