Friday, 3 August 2012

What is Life ?

ज़िंदगी को समझने की कोशिश :

ज़िंदगी क्या है ? यह एक ऐसा सवाल है जिस पर कवियों -शायरों , दार्शनिकों और विचारकों ने न जाने कितना सोचा-विचारा , कहा और लिखा है. शायद ही कोई ऐसा हो जिसने कभी न कभी , किसी न किसी मोड़ पर यह न सोचा हो या सोचने को मजबूर न हुआ हो कि आखिर ज़िंदगी है क्या? इसका मकसद और मतलब क्या है?ज़िंदगी है ही इतनी जटिल ,दुर्लभ, अदभुत, अबूझ और अप्रत्याशित कि इसे किसी परिभाषा में बांधना या व्यक्त करना मुमकिन नहीं. यदि ऐसा न होता तो हजारों वर्षों से इस दुनिया में रहते हुए क्या हम यह न जान पाते कि क्या है ज़िंदगी ? इतना जरुर है कि ज़िंदगी प्रकृ्ति का बेशकीमती उपहार है , ईश्वर की श्रेष्ठ रचना है, इसलिये अनमोल है , यही वजह है कि तमाम विसंगतियों , विरोधाभासों के बावजूद जीने की चाहत कभी किसी में कम नहीं होती , इसकी कशिश कभी खत्म नहीं होती. नियति पर भले किसी का जोर न हो , लेकिन अपना भविष्य गढ़ने की आज़ादी हर किसी को है, सपने देखने और उन्हें साकार करने की छूट सबको है.तभी तो मकसद और मंजिल से बेखबर , हम सभी अपने-अपने नज़रिये से ज़िंदगी को देखते, समझते , अर्थ देते और जीते हैं .ज़िंदगी शायद ऐसी ही पहेली का नाम है.
ज़िंदगी सौंदर्य है. आनंद , सपना, चुनौती ,कर्त्तव्य , संघर्ष , दुर्घटना या फिर जोखिम है, लेकिन है कीमती. और न जाने क्या-क्या है ज़िंदगी . आखिर किस अबूझ पहेली का नाम ज़िंदगी है, जिसे हर कोई अपने हिसाब से परिभाषित करता है. काव्यमय उद्धरणों और जज़्बाती पंक्तियों के साथ आइये कोशिश करते हैं  समझने की सही मायने ज़िंदगी के :
कैसी अजीब पहेली है ज़िंदगी ...... जब हम खुश होते हैं , तब बहुत प्यारी लगती है ज़िंदगी..... जब हम उदास होते है तब दुख भरी लगती है ज़िंदगी......जब दिल को कोई भा जाए, तब रंगीन बन जाती है ज़िंदगी...... जब मन सोच में डूबा हो, तब समुद्र से भी गहरी हो जाती है ज़िंदगी...... जब कठिनाइयां सामने आएं, तब मुश्किलों से लदी लगती है ज़िंदगी...... जब हौसलाअफज़ाई हो, तब प्रेरणा बन जाती है ज़िंदगी...... जब किसी के सामने झुकना पड़े , तब खामोश है ज़िंदगी.... जब बहुत कुछ सहना पड़े , तब लाचार है ज़िंदगी........जब दिल टूट जाए , तब गमों से घिरी है ज़िंदगी.......जब कुछ समझ न आए , तब घोर अंधेरा है ज़िंदगी.......जब सपने बिखर जाएं , तब आँखों का नम होना है ज़िंदगी....... जब सपने साकार हो जाएं , तब पागलपन है ज़िंदगी....... अपनों के लिये कुछ कर गुज़रने की चाहत है ज़िंदगी या यूँ कहें कि परिस्थिति के सांचे में खुद को ढ़ालना है ज़िंदगी.

शेक्स्पीयर के विचारानुसार , " वी आर सच स्टफ एज ड्रीम्स आर मेड आन एंड अवर लिटिल लाइफ इज़ राउंडेड विद अ स्लीप ." अर्थात हमारी ज़िंदगी नींद जैसी है , जो थोड़े से समय के लिये नींद से घिरी है.

अल्बर्ट आइन्स्टीन के अनुसार ,"ज़िंदगी जीने के दो ही रास्ते हैं . एक तो यह कि जैसे कुछ भी चमत्कार नहीं और दूसरा यह कि हर चीज़ चमत्कार है."

महात्मा गांधी के अनुसार, "जीवन ऐसा जियो, जैसे कि कल ही आप को मर जाना है लेकिन सीखो इस तरह जैसे कि आपको हमेशा के लिये जीवित रहना हो."

बाइबिल के अनुसार  , ' मानव जीवन इसलिये सुंदर और महत्वपूर्ण है क्योंकि ईश्वर ने इसे अपनी ही छवि में बनाया है.'

ज़िंदगी :
* वो पूछते हैं मुझसे, क्या है ज़िंदगी ......
उस परवरदिगार का एक एह्सान है ज़िंदगी.
बेसबब चलता रहा है जो सफर सबका , उसी सफर की एक दास्तान है ज़िंदगी.
मिलते हैं सब यहां , बिछड़ते हैं सब यहां, इसी शौक का एक इम्तहान  है ज़िंदगी.
खुशी है बरसात की तरह यहां लेकिन , गमों से लदता एक बियाबान है ज़िंदगी.
जो उलझो इसमें तो एक सवाल है ज़िंदगी, जो समझो इसे तो खुद अपना जवाब है ज़िंदगी.


* ज़िंदगी एक तोहफा है कुबूल कीजिए, ज़िंदगी एक अहसास है मह्सूस कीजिए.
ज़िंदगी एक दर्द है बांट लीजिए, ज़िंदगी एक आंसू है पी लीजिए.
ज़िंदगी एक प्यास है प्यार दीजिए.
ज़िंदगी एक जुदाई है, सब्र कीजिए.
ज़िंदगी एक मिलन है मुस्करा लीजिए.
ज़िंदगी आखिर ज़िंदगी है , इसे जी लीजिए.

* बड़ी जानी पह्चानी लगती हो तुम, कभी बड़ी अनजानी लगती हो तुम.
क्या बताएं तुम्हें ऎ ज़िंदगी, कितनी बेमानी लगती हो तुम .
जीते हैं जिसके लिए , उसी के लिये वक़्त नहीं,
हजार ख्वाहिशें हैं मुस्कराने के लिये, पर मुस्कराने के लिये वक़्त नहीं,
सोचा ये करते हैं अक्सर पर जवाब जिसका मिलता नहीं,
कि आखिर असल में क्या चीज़ होती है ये ज़िंदगी.

* ज़िंदगी से शिकायत किस शख्स को नहीं होती ,कर दे हर हसरत पूरी ,
ज़िंदगी की ऐसी फितरत नहीं होती.
ख्वाब तो दिखा देती है ज़िंदगी,
पर हर ख्वाब की मंजिल नहीं होती .
तमन्नाएं कुछ ऐसी भी होती हैं ,
जो कभी हासिल नहीं होती.

* ज़िंदगी के दिन कैसे भी हो , गुजर जाएंगे
एक दिन हम भी चुपके से ये दुनिया छोड़ जाएंगे ,
इस ज़िंदगी से हमेशा के लिये बिछड़ जाएंगे.

* छोटी सी है ज़िंदगी , हँस के जियो .
भुला के सारे गम , सिर उठा के जियो .
उदासी में क्यों रहना है ,मुस्करा के जियो.
अपने लिये ना सही, अपनों के लिये जियो.

* मैंने ज़िंदगी से पूछा , क्यों सबको इतना दर्द देती हो ,
ज़िंदगी ने हँस के कहा, हम तो सबको खुशी देते हैं
पर किसी की खुशी , किसी और का दर्द बन जाती है.

* ज़िंदगी से पूछो , ये क्या चाहती है?
बस, हर दिल से वफा चाहती है.
कितनी मासूम और नादान है ज़िंदगी,
खुद तो बेवफा है और दूसरों से वफा चाहती है.


* ना कुछ तेरा होगा , ना कुछ मेरा होगा
ज़िंदगी में बस ऊपर वाले का फैसला होगा.
कौन कहता है कि ये वक़्त हमारा है,
ये सिर्फ अहसास का धोखा है .
जीने के लिये जितना सोचोगे , उतना पछ्तावा होगा.

* ये ज़िंदगी बड़ी अजीब सी, कभी गुलजार सी , कभी बेजार सी
कभी खुशी हमारे साथ साथ , कभी गमों की बरसात सी.
ये ज़िंदगी बड़ी अजीब सी, कभी तूफानों में भी हैं रास्ते ,
कभी मंजिलों का पता नहीं,कभी दो कदम पर है ज़िंदगी.
कभी हर पल इम्तहान , कभी बिन मांगे इनाम,
है कभी कुछ नहीं, कभी सब कुछ सी है ज़िंदगी.


* जीवन स्वयं का पुनर्निर्माण करनी की निरंतर प्रक्रिया है.

* बुद्धिमान मनुष्य के लिये हर दिन नया जीवन होता है.

* जब हम जन्म लेते हैं , तब गीले , भूखे, चिल्ला रहे होते हैं...
  बाद में चीज़ें और भी बद्तर होती जाती हैं.

* खुद को कष्ट क्यों देते हो.....इसके लिये ज़िंदगी जो है.

* जीवन में एक दिन ऐसा भी आता है जब आपकी ज़िंदगी आपकी आँखों के सामने रील की तरह घूमती है . बस, इतना ध्यान रखें कि यह देखने के काबिल हो.
   गुजर चुके कल से सीखो , आज के लिये जियो और कल के लिये उम्मीद करो.

* ज़िंदगी एक पुल है , इसे पार करो ....इस पर घर मत बनाओ.

* हँसो तो मुस्कराती है ज़िंदगी, रोने पे आँसू बहाती है ज़िंदगी.
हाथ बढ़ाओ तो पास आती है ज़िंदगी, प्यार दो तो संवर जाती है ज़िंदगी.
जिस नज़र से देखो , वैसी नज़र आती है ज़िंदगी,
नज़रिया बदलते ही बदल जाती है ज़िंदगी.

* ये अजीब ज़िंदगानी है हमारी , जिसमें कल का है पता नहीं.
एक-एक पल को जीते हैं हम , पर जब कभी भी कल की सोचते हैं बात,
तब ज़ेहन में उठता है बस एक ही सवाल ,
कि क्या कल का कल होगा नसीब हमारी इस ज़िंदगानी में?
या हमारा आज ही है जिसमें खत्म हो चुका है कल ,
मह्सूस हमें होता है उस पल कि आखिर क्या कल ही है
वो आखिरी  कल हमारी इस ज़िंदगानी में.
पर कल के आज बन जाते ही शुरु होती हैं नई कश्मकश , नई तबदीलियाँ,
नये वायदे,
नई राहों पर चल निकलते हैं हम , सोचते हुए कि शायद अभी होने हैं,
और भी कल , हमारी इस ज़िंदगानी में.
पर हर वक़्त , हर पल , मलाल ये उठता है हमारे दिल में,
कि आखिर  कब होगा वो आखिरी कल,
हमारी इस ज़िंदगानी में.

उपरोक्त विवेचना के बावजूद मैं खुद को ज़िंदगी की सही मायने समझने में अक्षम मह्सूस कर रहा हूँ...... ज़िंदगी के बारे में आप का क्या नज़रिया है ? इस प्रश्न के उत्तर की आप सब से अपेक्षा के साथ मैं तो बस यही कहूँगा कि ज़िंदगी एक अनसुलझी पहेली है......  जो बेहद अलबेली है .....मोह - माया के संगम से बनी , खुशियों व गमों से सजी, ज़िंदगी एक जोखिम भरी चुनौती है....ज़िंदगी सिर्फ और सिर्फ एक अबूझ पहेली है.......

आपके विचारों, टिप्पणियों, सलाहों  के इंतजार के साथ , आपका :

                                                      - ऋषभ शुक्ल




 


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3 comments:

  1. nice post dear ..... great thoughts abt life ...... even i will also conclude my comment by saying ," life is an unsolvbed mystery "....kudos

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  2. You are so totally, absolutely, incredibly right, and thank you for sharing

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  3. As always, a million times, thank you for sharing such great thoughts...
    - kunal bharat

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