Friday, 31 August 2012

तन्हाई



तन्हाई :
तन्हा - ए- दिल का किसको मलाल है,
पीपल की शाख कटने का सबको ख्याल है .
दूर तक फैली है दिल की तन्हाई ,
पर तन्हा -ए- सफर में किस हमसफर का साथ है .
अरमां दिल के तन्हाई में कहीं खो गए,
खोए हुए अरमानों का किसको मलाल है.
आँखो में आंसू तन्हाई ये दे गई,
पर आँसुओं के बहने का किसको एहसास है.
वफा के बदले बेवफाई वो कर गए,
बेवफाई कर के भी , बेफवाई पर कौन शर्मसार है.
बेवफाई कर हमें छोड़ वो चली गईं
चली गईं , तो चली गईं........
अरे ! " दूसरी" भी तो पल भर में तैयार है !!


( आधुनिक समाज के आशिकों की हुंकार )


                                                  - ऋषभ शुक्ल





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3 comments:

  1. bahut khub sahiban bas itna kehna chahta hu ki is aadhunik samaj me bhi aise ashique hai jo sath me jaan bhi de dete hai.

    PLease PLease PLease PLease don't ignore them and if possible respect their love at least.

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  2. प्रिय अनीश जी,
    मेरी कविता पर आपकी अनमोल टिप्पणी के लिये हृ्दय से आपको धन्यवाद . आपकी बात से मैं पूर्णतया सहमत हूँ कि आज भी हमारे आधुनिक समाज में सच्चे प्रेम को संजो कर रखने वाले बहुत आशिक हैं ...परंतु कविता की आखिरी पंक्तियों में कविता का जिस तेजी से रस बदला है ....वही कुछ आधुनिक आशिकों का रवैया भी है ...... खैर, भविष्य में सच्चे प्रेम पर आधारित मेरे लेखों से जल्द ही आपका साक्षात्कार होगा ...तब तक अपनी बहुमूल्य टिप्पणियों से हमें अनुग्रहीत करते रहें...... धन्यवाद

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  3. thumbs up for such a wonderful & interesting poetry

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