Friday, 3 August 2012

'नाम' की सियासत :

दोस्तों ! बड़े ही दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि मेरा लेखन कैरियर शायद अपने अंत की ओर अग्रसर है........ क्योंकि इंटीरियर डिज़ायन, वास्तु , फेंग शुई, समीक्षा आदि पर कुछ भी लिख दूँ तो संपादक महोदय तारीफों के पुल बाँध देते हैं......पर जहाँ सामाजिक व राजनैतिक मुद्दों पर कलम चलाता हूँ तो बस संपादक महोदय के चेहरे की शिकन ही मुझे इस सच से अवगत करा देती है कि ऋषभ बेटा ! चलो अपने चिटठे { Blog } के द्वार .......फिर भी संपादक महोदय के तरफ ट्कटकी लगा के इस उम्मीद से देखता हूँ कि शायद इस बार मुझे वो सुनना ना पड़े जो प्राय: सामाजिक व राजनैतिक मुद्दों पर कलम चलाने के बाद मुझे सुनना पड़ता है.......जानते हैं वो चंद पंक्तियाँ क्या होती हैं ," ऋषभ जी ! आपको नहीं लगता कि ये लेख पत्रिका/ अखबार में छपने के लिहाज से काफी विवादास्पद है... और जिस पर चाहे जितना संपादन किया जाए इस लेख का विवाद रस खत्म नहीं होगा तो माफ कीजियेगा पर इस लेख का प्रकाशन संभव् नहीं."
और मेरी आत्मा मन ही मन बस कहती है , " नहीं, नहीं, नहीं ."
अब क्या करुँ मेरी कलम सच के अलावा दूसरी भाषा जानती ही नहीं.... उसे नहीं पता कि सच लिखने पर Controversy हो जाती है, अखबार/ पत्रिकायें बंद हो जाती हैं , और लोगों की नींदे उड़ जाती हैं...... मेरी खड़ूस कलम का तो बस यही फंडा है कि, ' सीधी बात नो बकवास .. क्लीयर है ! '
चलिये आप इस लेख को कृ्प्या पढ़ें और अपनी टिप्पणियों, सलाहों द्वारा मुझे अनुग्रहीत करें.............








'नाम' की सियासत :

ज-कल की ताजा खबर : उत्तर प्रदेश के आठ जिलों के नाम बदल दिये गए हैं. अखिलेश सरकार द्वारा लिया गया अभी तक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय. अब उत्तर प्रदेश के प्रबुद्धनगर को शामली , भीमनगर को संभल , पंचशीलनगर को हापुड़ , महामाया नगर को हाथरस, ज्योतिबा फूलेनगर को अमरोहा, कांशीराम नगर को कासगंज , छत्रपति शाहुजी महाराज नगर को अमेठी और रमाबाई नगर को कानपुर देहात के नाम से जाना जाएगा. पर हमेशा की ही तरह इस बार भी अखिलेश सरकार के निर्णय पर फिर वही हो-हल्ला.
और इस हो-हल्ला के पीछे तर्क यह है कि जिलों के नाम बदलने से सूबे के बिगड़े हालात तो नहीं सुधरेंगे..... अरे भाई ! इतनी जरा सी बात लोगों को खासकर हमारे प्यारे न्यूज़ चैनल वालों को समझ क्यों नहीं आती कि किसी जगह को सजाने ....उसे सुंदर बनाने के लिये सर्वप्रथम उस जगह की गंदगी को तो साफ करना की पड़ता है...... बाकी सजावटी कार्य तो बाद की बात है. माया सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश के जिलों के नाम बदलने का फैसला किया गया, जो बेहद निंदनीय था.. इसलिये नहीं कि उन जिलों के नाम माया सरकार के प्रेरणास्रोत महापुरुषों के नाम पर थे, बल्कि माया सरकार के इस फैसले में खुद ही जात -पात की भावना को भड़काने व सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने की कोशिश की गई. माया सरकार अपने कार्यकाल में ' सर्वजन हिताय , सर्वजन सुखाए' की तर्ज पर कार्य करने की दुहाई देती रही पर हकीकत इससे उलट थी. उत्तर प्रदेश की विरासत , उसकी मिट्टी की पहचान , उत्तर प्रदेश के जिलों, गावों, विश्वविद्यालयों आदि के नामों के साथ छेड़छाड़ पूरे उत्तर प्रदेश के इतिहास व पहचान के साथ छेड़छाड़ करने जैसा था , जिसे माया सरकार द्वारा बड़ी ही बेशर्मी से अंजाम दिया गया.
यदि माया सरकार को इन महापुरुषों की हमारे देश भारत की उन्नति में भूमिका को आम लोगों के सामने लाना था तो उन्हें इन महापुरुषों के नाम पर और नए विद्यालयों , विश्वविद्यालयों, अस्पतालों आदि का निर्माण अलग- अलग जिलों, नगरों, गावों आदि में करावाना चाहिये था इससे लोग हर वक्त इन महापुरुषों को याद करते और हमारे लिए उनके द्वारा किये गए बलिदानों, संघर्षों के लिये हर पल उन्हें धन्यवाद करते जिससे इन महापुरुषों की आत्माओं को भी शांति मिलती पर उनके नाम पर की गई माया सरकार की सियासत से साफ होता है कि माया सरकार के ये फैसले दलितों के हित में तो कतई नहीं थे.
हमारे देश में निचली जाति के लोगों के लिये आरछ्ण की सुविधा है जिससे गत समय में हुए उनके साथ दुर्व्यवहार की बहुत हद तक भरपाई हो जाती है. परंतु दलितों के नाम पर की जाने वाली सियासत ....दलितों की खराब स्थिति को आधार बनाकर सिर्फ वोट के लिये उनकी भावनाओं को बार -बार भड़काने से बेहतर होता कि माया सरकार उनकी उन्नति के लिये भरकस और जायज़ प्रयास कर लेती. चलो मान लेते हैं कि माया सरकार को दलितों के साथ हुए अन्याय का बदला दलित महापुरुषों के नाम पर ही लेना था तो महामाननीय मायावती जी...... को अपनी मूर्तियाँ , अपनी जीवन गाथा पर पुस्तक छपवाने से बेहतर था कि वो ऐसी मूर्तियों का निर्माण करातीं जिससे इन महापुरुषों के योगदान की गाथा जन - जन तक पहुँचती. पर पूरे उत्तर प्रदेश के गौरवशाली इतिहास से छेड़छाड़ तो अपनी कुर्सी, अपनी सत्ता का दुरुपयोग के अलावा और कुछ नहीं.
उत्तर प्रदेश में स्थित अंतराष्ट्रीय ख्याती प्राप्त केजीएमयू का नाम छत्रपतिशाहु जी महाराज के नाम पर किया गया था तो यहाँ के शिक्षकों , छात्रों ने भी सवाल उठाया था कि शाहु जी महाराज का इस विवि से क्या लेना - देना ? किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज केवल देश -विदेश में ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी ख्याती प्राप्त है .लगभग 105 वर्षों से चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उसका अलग महत्व रहा है. यहाँ से अध्ययन प्राप्त स्नातक एवं स्नातकोत्तर चिकित्सक आज भी अमेरिका, कनाडा , आस्ट्रेलिया, इंग्लैण्ड तथा अन्य देशों में कार्यरत हैं. संस्था का नाम छत्रपतिशाहु जी महाराज चिकित्सा विवि करने से इसकी ख्याति प्रभावित हुई है तथा देश के अन्य भागों में व विदेशों में इस संस्था का नाम छत्रपतिशाहु जी महाराज विवि बताये जाने के साथ- साथ इसके पूर्व नाम 'किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज' बताये जाने की आवश्यकता होती है.
माया सरकार आज विपक्ष की भूमिका निभा रही है ..परंतु उत्तर प्रदेश की राजनीति कि ये विडंबना तो देखिये कि बसपा सरकार के कुछ राजनेता अपनी हार को लेकर इस कदर हिल गए हैं कि एक नेता के मुख पर किस तरह की बाते शोभा देती हैं वो इसका भी लिहाज व तमीज़ भूल गए. एक न्यूज़ चैनल पर इसी विषय पर हो रही बहस देखते- देखते मैं तो दंग रह गया . बसपा सरकार के कोई नेता फलाना 'मौर्य' ........ करके थे ...इस विषय पर जब उनके विचार सुनने की बारी आई तो विचारों की जगह ये धमकी सुनाई दी कि, "अभी माया सरकार उचित समय का इंतजार कर रही है ..... समय पर सपा के लोगों को बतायेंगे { मुंडी कुछ जरुरत से अधिक हिलाते हुए} "............ अरे भाई ! क्या बताएंगे?
एक अन्य नेता श्री ...... { बसपा के ही थे } ... उनसे पूछे जाने पर कि यदि एक बार जनता माया सरकार को पुन: मौका दे तो क्या फिर माया सरकार के राज में इन जिलों के नाम बदले जाएंगे ? इस प्रश्न के उत्तर के बदले काफी घुमावदार बातों से दर्शकों का सामना हुआ ........न्यूज़ रीडर के पुन: प्रश्न पूछने पर ......... बड़ी खीज के साथ जवाब आया कि " जी हाँ ! बिल्कुल बदल देंगे ....आप उत्तर प्रदेश की बात कर रहे हैं यदि बस चले तो पूरे देश के जिलों, नगरों आदि के नाम बदल देंगे ."
इस उत्तर पर न्यूज़ रीडर के साथ हर श्रोता स्तब्ध था कि हमारे उत्तर प्रदेश के विपक्ष की कमान ऐसे नेताओं के हाथ में है... जो जात-पात की दुहाई तो बहुत देते है पर खुद की मानसिक कुंठाओं का अंत करना ही नहीं चाहते और अपनी कुंठाओं की आग में पूरे राज्य व देश को झोंक देना चाहते हैं... ऐसे नेताओं की बातचीत सुन तो यही लगता है कि ये स्वयं हमारे देश को जात - पात से ऊपर उठते देखना ही नहीं चाहते ... बस 'नाम' की राजनीति चलती रहे..... सत्ता की कुर्सी उन्हें मिलती रहे और जनता के वोटों और जनता के लिये सरकार द्वारा उपलब्ध रुपये से इन नेताओं की ज़िंदगी चलती रहे और भोली-भाली जनता तिल-तिल कर धुटती रहे , मरती रहे.
अखिलेश सरकार पर सबसे बड़ा आरोप है कि उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था वो सुधार नहीं पाये , कानून व्यवस्था में कोई सुधार नहीं , अपराधों व गुंडा-राज पर कोई लगाम नहीं ........पर कोई आम आदमी से पूछे कि आखिर माया सरकार ने भी उत्तर प्रदेश की कौन सी जमीनी समस्याओं को खत्म कर कानूनी, राजनैतिक, समाजिक, आर्थिक आदि व्यवस्थाओं में सकारात्मक प्रयास कर कौन से शिखर पर पहुँचा दिया सिवाये इसके कि मुख्यत: अपनी मूर्तियाँ बनवाने और जन भावनाओं को निरंतर भड़काने के अलावा अपने पाँच वर्षीय कार्यकाल में माया सरकार ने कौन से क्रांतिकारी बदलावों से उत्तर प्रदेश का सकारात्मक स्तर पर चेहरा बदल दिया ?
रही बात अखिलेश सरकार की, अरे भाई ! सियासत में आए अभी 6 माह भी पूर्ण नहीं किये इस सरकार ने. थोड़ा वक्त दीजिये जनाब और उसके बाद किसी फैसले पर पहुँचिये ... माया सरकार उत्तर प्रदेश के लिये क्या-क्या कर सकती थी इसकी झलक हमने पिछले 5 सालों में देख ली है और अखिलेश सरकार उत्तर प्रदेश के लिये क्या करेगी वो देखना बाकी है...... रही बात इसकी जिसका जिक्र बार-बार किया जाता है कि अखिलेश सरकार अपने निर्णयों को बदलती रहती है..... मेरे अनुसार इसका कारण यह है कि शायद पिछली सरकार ने अपने कार्यकाल में इतनी गंदगी मचा रखी थी ..कि अखिलेश सरकार यही नहीं समझ पा रही है कि अब ये गंद समेटने की शुरुआत कहाँ से करे ???? बेचारी अखिलेश सरकार तो शायद दुसरों द्वारा की गई गलतियों को समेटते- समेटते स्वयं ही कभी-कभी गलती कर देती है. परंतु शीघ्र ही अपनी गलती को सुधार भी लेती है. इस पर हमें अखिलेश सरकार के लिए हमदर्दी रखनी चाहिये बाकि ये लोकतंत्र है , जहाँ जनता सब कुछ जानती है और जो इस जनता से गद्दारी करेगा तो यही जनता जात - पात के भेद को मिटा कर जनता के साथ धोखा करने वालों का एक दिन वो हाल करेगी जिसका अंजाम रुह में कँपन पैदा करने वाला ही होगा.
पर इन परेशानियों व माया सरकार की लचर व्यवस्था व जात- पात को बढ़ावा देने वाले निर्णयों से हमारे प्यारे मीडिया वालों को क्या लेना देना.. उन्हें तो बस बकवास बाजी करनी है. स्थिति चाहे जैसी भी हो The news must go on ..............

आपके विचारों, टिप्पणियों, सलाहों के इंतजार के साथ , आपका :

- ऋषभ शुक्ल

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1 comment:

  1. well said ......thanks for sharing your precious opinions :-)

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