Tuesday, 28 August 2012

एक कोना....


आकांक्षा सिंह , की कविताओं में जीवन का भोगा हुआ यथार्थ है . बकौल उनके , "जीवन का संघर्ष ही मेरी धरोहर है, और कविता मेरे लिये कोई चर्चा का विषय नहीं बल्कि अनुभूतियां हैं , जो मेरी रुह में बसती हैं."  फिल्म लेखन में विशेष रुचि .....कानपुर ( यू. पी.) में रहनवारी. आज  आकांक्षा की एक बेहद संवेदनशील व दिल को छूने वाली कविता को यहाँ प्रकाशित कर रहा हूँ.



एक कोना....

ये कैसा वक़्त है ,ये कैसा समां है,
ये कौन सा भँवर है, जिसमें हर वक़्त,
दिल ये मेरा घुटता है .
दिल मेरा हो गया है अब तो एक भार,
पथराई आँखो तक आ पहुँची है,
आँसुओं की धार .
बस एक कोना ढूँढ़ती हूँ ,
जिसमें छुप कर हल्का कर सकूँ,
आँखो के रास्ते , दिल के भार को आज.
आँसू आँखो से बह जाने को हैं आतुर,
पर ये अजीब नसीब है मेरा ,
कि नहीं मिलता है एक कोना.
जहाँ दुनिया की निगाहों से,
छिप कर आँसू अपने बहाऊँ .
भागती फिरती हूँ मैं हर वक़्त,
हर पल , हर एक शख्स से,
कि कहीँ कोई मेरी आँखो में ठहरे ,
आँसुओं से रुबरु न हो जाए ,
बस ढूढ़ती फिरती हूँ मैं, एक कोना,
जहाँ मुझे भी खुल के आ सके रोना.

   - आकांक्षा सिंह, कानपुर ( यू. पी )

Posted by:  Rishabh Views On Modern Society.


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2 comments:

  1. guet post ........nice dear ..can i have pleasure of sharing some stuff with your blog ?///

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  2. this is amazing ..good idea of sharing other's talent under your blog ..keep it up

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