Friday, 3 August 2012

ढाई अक्षरों की सटीक परिभाषा :

ढाई अक्षरों की सटीक परिभाषा :


Note: I posted this article on a special demand of one of my best friends.Hope i did full justice with this article & the expectations of my friend.Plz. continue reading..



म सभी ने कभी न कभी किसी न किसी से प्यार किया है . आखिर प्यार है ही इतना खूबसूरत एह्सास जिसके आगोश में हर कोई समा जाना चाहता है , अपना सब कुछ लुटा देना चाहता है.प्यार के विषय पर न जाने कितनी ही बातें , किताबें , गीत, कवितायें , शायरी, फिल्म आदि लिखी व बनाई गईं. प्यार के बिना ज़िन्दगी की कल्पना ही नहीं की जा सकती परंतु प्यार के इस शब्द को क्या किसी ने गहराई से समझा ? क्यों लगती है ज़िन्दगी प्यार के बिना अधूरी सी, बदरंग सी ? आखिर क्यों है प्यार में सब कुछ जायज़ आईये जानते हैं, ढाई अक्षरों की सटीक परिभाषाः
प्यार बाज़ार में नहीं बिकता , ना उसे बगिया में उगाया जा सकता है. राजा हो या रंक जो सिर झुकाएगा, प्यार उसे मिल जाएगा. यह सिर झुकाना दो तरह से है , एक तो अहंकार को छोड़ देना , समर्पण और दूसरा खुद को भुला देना. दोनों ही स्थितियों में देना है. परंतु प्यार में असल दिक्कत यह है कि प्यार कि भूख सबको है पर देने को कोई राज़ी नहीं. यह कहते हुए काफी लोगों को आपने देखा होगा कि उन्हें सच्चा प्यार नहीं मिला , जबकि शायद ही कोई प्यार करने को उतावला  नज़र आता है. सच्चाई तो यह है कि प्यार को लेकर जितनी भी बातें की जाती हैं , वह प्यार है ही नहीं. प्यार को मह्सूस करने के लिये उसमें डूबना पड़ता है , खुद को मिटा कर -उसके रंग में रंग जाना होता है. खुद को मिटाना है प्यार, सौ प्रतिशत समपर्ण है प्यार, बलिदान का पर्याय है प्यार.



जिसको अकसर 'प्यार' समझने की हमसे भूल हो जाती है , वह आकर्षण है, लिप्सा है, लेन देन है. हमारे समाज में तो संबंधों को प्यार में लपेटकर देखने का रिवाज़ है. जो असल प्यार है वो तो कहीं गुम होता जा रहा है .प्यार दिमाग से नहीं होता , ये होता है तो होता है , नहीं होता तो सिखाया भी नहीं जा सकता. एक पतंगा आग से बेपनाह प्यार करता है , मर जाने तक, उस आग में स्वाहा हो जाता है , ये आग के प्रति उसकी मोहब्बत है. परंतु वैसा प्यार अब नज़र नहीं आता.
प्यार प्रयास से नहीं हो सकता, क्योंकि बिना इसमें डूबे इसका एह्सास नहीं हो सकता. जो इसमें जितना डूबा , उसको ये उतना ही मिला.  कुछ लोग तो मात्र दैहिक खिंचाव को ही प्यार मान कर बैठ जाते हैं. प्यार के ढाई अक्षरों को समझने के लिये आज कल लोग लव साइंस में जा अटके हैं.  हार्मोनों को दोष दे रहे हैं.  प्यार के नाम पर ढकोसला करने वाले टयूशनों का लोभ देते फिर रहे हैं. प्यार का भी बाज़ारीकरण कर डाला है कुछ लोगों ने. पर सच तो यह है कि प्यार को कभी भी किसी पर भी थोपा नहीं जा सकता.
जब आप किसी से कहते है कि आप उससे प्यार करते हैं तो यह बहुत अच्छी स्थिति होती है लेकिन जैसे ही चालाकी , अधिकार और दबाव बढ़ने लगते हैं,  वैसे ही जलन, तनाव, बढ़ते हैं ,अपेक्षाएं बढ़ती हैं , ये अपेक्षाएं प्यार नहीं हैं.  देह की भूख, सेक्स की भूख भी प्यार नहीं. अगर आपका प्यार बदले में कुछ भी मांगते  है तो वो प्यार नहीं.
ईर्ष्या व अपेक्षाओं के साथ प्यार नहीं टिकता . और अंत में, मैं आप सब से यही कहूंगा कि प्यार इसलिये करो किः


         रिश्ता बनाना है, रिश्ता निभाने के लिये,
              जीवन के अन्त तक साथ निभाने के लिये,
        प्यार में जीने और प्यार में मर जाने के लिये,
              सर्वस्व प्यार में लुटाने के लिये,
       प्यार में खो के प्यार का हो जाने के लिये,
              प्यार के रंग में रंग जाने के लिये,
       पतंगे की भांति ही आग में जल जाने के लिये,
              प्यार में प्यार का हो जाने के लिये.

                                                                          - ऋषभ शुक्ल






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2 comments:

  1. he article is one of your best articles in my opinion ..... a great , outstanding & amazing analysis on the most difficult subject to understand i,e 'love'.

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  2. really true meaning of love ...a very well analysis & very well written article......thanks for sharing & describing the most beautiful feeling [love] in your beautiful words

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