Friday, 3 August 2012

Are you a Porn Lover ?????

Are you a Porn Lover ?????


कुछ पुरुषों में पोर्न फिल्मों /क्लिप्स के प्रति दीवानगी इसी से समझी जा सकती है कि वे अपनी लिप्सा को विधानसभा जैसी पवित्र जगह में भी नहीं रोक सकते .अभी कुछ दिनों पूर्व सामने आये इस मामले में कुछ मंत्रियों को मिल जुल कर पोर्न क्लिप का मजा लेते हुए पकड़ा गया....बेहद शर्मसार कर देने वाली खबर जो हर न्यूज़ चैनल पर दिखाई गई. जिस क्लिप का मजा लेते ये मंत्री कैमरे पर पकड़े गए , उसको किसी रेव पार्टी का सीन बताया गया था .ये रेव पार्टियाँ युवाओं का क्रेज हैं. जिनमें नशे की तमाम चीजों के साथ उन्मुक्त काम क्रिया की परंपरा भी है . यह पश्चिम से आया जुनून है, जिसमें शामिल लोगों की आपसी रजामंदी होती है.यहां कुछ भी जबरन नहीं होता , ना ही किसी तरह की ब्लैक-मेलिंग होती है. ये व्यस्क मौज-मस्ती के लिये सामूहिक रुप से सब करते हैं .इस विषय में आगे बढ़ने से पहले आइये जानते हैं पोर्न से जुड़ी कुछ सच्चाइयां.
 पोर्नोग्राफी में हर क्षण 3.075 डॉलर से ज्यादा की रकम खर्च हो रही है ,जिसको 28,258 नेट यूजर्स देखते हैं . नेट के आंकड़े बता रहे हैं कि 24,644,172 ( लगभग 12 फीसदी ) वेबसाइट्स पोर्नोग्राफिक हैं .पोर्नोग्राफी का धंधा हमेशा से बूम पर रहा है , ढेरों लोगों के लिये यह मुनाफा कमाने का पसंदीदा काम है . इसमें हर वर्ग के लोगों की भागीदारी है , खासकर पुरुषों की. नेट पर खोज करने वालों की 25 फीसदी यानी 6 करोड़ 80 लाख जिग्यासाएं पोर्नोग्राफी संबंधी होती हैं .इंटरनेट से डाउनलोड की जाने वाली सामग्री का 35 फीसदी हिस्सा पोर्नोग्राफिक होता है. अभी कुछ समय पूर्व सर्च इंजन गूगल ने बताया था कि भारतीय 'सेक्स' की खोज करने में अव्वल हैं ..खासकर बिहार और बंगाल के पुरुषों का रुझान इस शब्द में बहुत ज्यादा दिखा .
कंप्यूटर क्रांती ने गोपनीयता को खास जगह दी, इससे भी आगे आ गया मोबाइल फोन. यह जादू की डिबिया , गोपन को किसी भी कोने में सुविधाजनक रुप से ओपन कर रही है. कुछ व्यवसायी ' गंदा है पर धंधा है ये ' की तर्ज पर पोर्न व्यवसाय द्वारा अपनी जेबें गर्म करने से तनिक भी नहीं हिचकिचाते . अभी ज्यादा समय नहीं बीता है जब इन्हीं व्यवसायियों ने एक चोलाधारी स्वामी और तमिल हीरोइन के सेक्स फुटेज बेच कर लाभ कमाने का आनंद लिया. सच तो यह है कि धंधे में शामिल और मजा लेने वालों को यदि कोई दिक्कत नहीं है तो बाकी लोगों को परेशान होने की ज्यादा जरुरत भी नहीं होना चाहिये , क्योंकि जिसको हम सभ्य समाज कहते हैं , वह अपनी नन्हीं-नन्हीं बच्चियों को भी नहीं छोड़ता . अभी कुछ समय पूर्व मासूम पलक का मामला मीडिया में छाया हुआ था, जो चाइल्ड ट्रैफिकिंग की झलक भर है. मासूम बच्चों से सेक्स करने वाले और इनकी फिल्में बनाने वालों का पर्दाफाश बीच- बीच में होता रहता है. परंतु दिक्कत तो यह है कि अपने समाज में अब भी इतनी चेतना नहीं आई है कि वे गलत के खिलाफ जंग लड़ सकें.
वे लोग जो पोर्न या अश्लील साहित्य में डूबे रहते हैं , उनकी मानसिकता पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है. वे उन्माद में कुछ भी करने पर उतारु हो सकते हैं. राजधानी में ही सड़क चलती लड़की को गाड़ी के भीतर खींच कर रेप करने वालों का कहर इसी का हिस्सा है .सेक्स और देह की भूख , पोर्न पसंद पुरुषों को पागल कर देती है और उनके दिमाग में पहले से ही घुसा मर्दवादी अहंकार इस लिप्सा को और भी हवा देता है. ऐसे लोग जो पोर्न या अश्लील साहित्य में डूबे रहते हैं, उनकी सारी की सारी आपसी बातचीत और बर्ताव पर सेक्स हावी रहता है . अपनी हेकड़ी दिखानी हो या दुसरों को नीचा , उनके लिए ये गोपन अंग और संबंध औजार ज्यादा हो जाते हैं , जिसका खामियाजा हमेशा से औरतें ही भुगतती आ रही हैं .पोर्न या अश्लील साहित्य में डूबे रहने वाले पुरुषों को हर औरत हर वक़्त न्यूड नजर आती है. फब्तियां कसते और उनके वक्ष स्थल को निहारते हुए वे अपनी व्यस्क होती बच्चियों को भी भुला देते हैं . हद तो तब हो जाती है जब ऐसे पुरुषों की मानसिक विकृ्तियों का बेहद घिनौना रुप ऐसे सामने आता है जब वे अपनी ही पत्नियों से उम्मीद करते हैं की वो बिस्तर पर कुछ उसी तरह के पोज दें , जो वो अक्सर पोर्न फिल्मों में देखते हैं.
नोएडा के पब्लिक स्कूल की बच्ची का सेक्स एमएमएस हाथों हाथ जिस तेजी से प्रसारित किया गया था, उसी से पता चल गया था कि कुछ पुरुषों की पोर्न के प्रति अति लिप्सा व लपलपाहट पर कोई लगाम नहीं लग सकती . मोबाइल कंपनियों ने ऎसे लोगों की जेब काट्ने के लिये डर्टी जोक्स का धंधा भी चला रखा है. जिस पर हंसने वाला अपने भीतर की भूख को रोजाना सहलाता है और अपने दोस्तों से भी शेयर करता है.
अध्ययन कहते हैं कि पोर्न नियमित देखने वालों को बिस्तर पर ज्यादा दिक्कत आती है . सेक्सोलॉजिस्ट इसके तकनीकी पक्ष पर काफी बारीकी से बताते हैं . फिर भी कुछ पुरुषों में इसके प्रति गहरा आकर्षण है. घर से दफ्तर तक वे स्क्रीनों पर सेक्सी उददंड्ताओं का आनंद लेने के लिये लार टपकाते पकड़े जाते हैं. सड़क पर औरतों से सट कर चलते हैं और मौका पाकर इधर-उधत हाथ लगाने से भी बाज नहीं आते हैं . गंदी जुबान का इस्तेमाल करते हैं , नाजुक अंगों को लेकर गाली गलौज में माहिर होते हैं. पोर्न के दिवाने ऐसे लोगों के मन मस्तिष्क पर सेक्स इतना हावी होता चला जाता है कि हर जगह इसके अलावा उन्हें और कुछ नजर नहीं आता .
 'बिग बॉस' , 'रोडीज़', 'स्प्लिटविला' जैसे रियलिटी शोस में भी काफी प्रायोजित टाइप की चूमा-चाटी दिखाने के प्रयास होते रहते हैं. खुलापन और छिछोरागर्दी को एक ही मान बैठने वालों को इनमें अंतर समझाने की जरुरत मैं कतई नहीं समझता .
पोर्न या अश्लील साहित्य पसंद मर्द अपनी कुंठाओं व भूख को शांत करने के लिये और वे नामर्द नहीं हैं इसका साक्ष्य देने के लिये , सेक्स को आधार बना कर समाज में गंद मचाये पड़े हैं . बेहतर होगा कि ऐसे मर्द अपनी मर्दानगी पर खुद ही पाबंदी लगा लें वरना वो दिन दूर नहीं होगा कि पोर्न फिल्मों/ क्लिप्स् को देख खुद को उत्तेजित कर जब वे अपनी जिस्मानी भूख शांत करने के लिये सड़क पर निकलेंगे और काम -वासना व हवस से भरी निगाहों से हर औरत के जिस्म को अपनी जागीर समझ उसका उपभोग करने का विचार मन में लाएंगे , तब कभी ना कभी ऐसे मर्दों की जिस्मानी उत्तेजना को सरेआम सड़क पर ऐसे काट कर फेंका जाएगा कि उनकी मर्दानगी नपुंसकता में तबदील होने में बस पल भर का समय ही लगेगा.
आपके विचारों, टिप्पणियों, सलाहों  के इंतजार के साथ , आपका :


                                                      - ऋषभ शुक्ल

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2 comments:

  1. found this post full of interesting things to think about. Thanks!

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  2. very strong opinions

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